"उत्तरा राव, जानकी परांजपे, अरविंद शाह, के. सुब्बा राव और सुमित्रा अय्यर पहली बार 1998 में आई.आई.एस.सी., बैंगलोर में एक-दूसरे से मिले। बिल्कुल अलग पृष्ठभूमि से आने के बावजूद ये पाँचों जल्द ही दोस्त बन गए। रिश्तों, कॅरियर और जिंदगी के उतार-चढ़ाव के बीच वे पच्चीस साल बाद कैंपस में वापस आने का संकल्प लेते हैं। कठिनाइयों, दृढ़ता, सफलताओं और निराशाओं की कहानी पर केंद्रित यह पुस्तक पाँच दोस्तों के जीवन की पड़ताल करती है-जब वे पीछे मुड़कर देखते हैं और याद करते हैं कि कैसे जिंदगी ने उनके लिए वाकई एक चक्र पूरा कर लिया है। प्रेरणादायक और यथार्थवादी, 'जिंदगी का सफर' पाँच दोस्तों की एक मार्मिक कहानी है, जो जीवन की बड़ी उम्मीदों से जूझते हैं।"