एक साल से अधिक समय तक लॉकडाउन में रहने के बाद नूनी अब चौदह साल की हो गई है और सोमनहल्ली में अपने अज्जा-अज्जी से मिलने के लिए पूरी तरह तैयार है। प्यारी नूनी की मीठी-मीठी कहानियाँ’ में उनके आखिरी साहसिक कार्य की यादें—जहाँ उन्होंने एक प्राचीन बावड़ी की खोज की थी—मौजूद हैं; आज भी सबके मस्तिष्क में ताजा हैं। अंतत: घर की सीमाओं से बाहर निकलने को उत्साहित नूनी को शायद ही पता हो कि वह एक और खोज करने जा रही है। और इस बार अपनी न समाप्त होनेवाली जिज्ञासा के कारण वह अपने परिवार के इतिहास के एक अनजाने अध्याय को खोलेगी। सुधा मूर्ति की अनूठी शैली में लिखी गई ‘द मैजिक ऑफ The Lost Story प्रश्न पूछने और उत्तरों को जीवित रखने के महत्त्व को दरशाती है। रमणीय चित्रों और अद्भुत दृश्यों से भरपूर, भारत की पसंदीदा कहानीकार हमें शानदार तुंगभद्रा नदी के साथ-साथ एक अविस्मरणीय यात्रा पर ले जाती है।