श्रीविष्णुसहस्रनाम स्तोत्र में भगवान श्रीविष्णु के एक हजार नाम एक सो आठ श्लोकों मे समाहित है। श्री विष्णुसहस्रनाम स्त्रोत की रचना श्री व्यास मुनि ने की थी। श्रीविष्णु के प्रत्येक नाम मे दैविक शक्ति समाहित हैं तथा इसका उच्चारण शरीर, मन, एवम् आत्मा को शुद्ध व पवित्र करता हैं और आध्यात्मिकता की ओर अग्रसर करता हैं। ऐसा माना जाता है कि भगवान विष्णु सभी ग्रहो के कारक हैं एवम् श्रीविष्णुसहस्रनाम स्तोत्र के उच्चारण से सभी ग्रह दोषो का नाश होता है तथा यश, सुख, ऐश्वर्य, संपन्नता, सफलता, आरोग्य एवं सौभाग्य प्राप्त होता है तथा मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।